अध्याय 2 · पाठ 125 मिनट

शिपिंग बिल और लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर

ICEGATE पर निर्यात कैसे घोषित करें, कस्टम्स उसे कैसे क्लियर करता है, और वही शिपिंग बिल आपके बैंक और एक्सपोर्ट इंसेंटिव तक कैसे पहुँचता है।

जहाज़ पर कंटेनर लादती क्रेन और मंज़ूरी का चेकमार्क।

शिपिंग बिल क्या है

शिपिंग बिल भारतीय कस्टम्स को दी गई आपकी घोषणा है कि आप माल निर्यात कर रहे हैं। जिन कस्टम स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम चलता है, वहाँ यह ICEGATE पर फ़ाइल होता है: आप ख़ुद डिजिटल सिग्नेचर से, आपका कस्टम ब्रोकर (CHA), या कस्टम्स के सर्विस सेंटर के ज़रिए।

जैसे ही सिस्टम शिपिंग बिल को नंबर देता है, वह फ़ाइल हुआ माना जाता है और आपका सेल्फ़-असेसमेंट पूरा माना जाता है। इसके बाद कस्टम्स आपकी घोषणा की जाँच करता है।

इसमें क्या-क्या भरा जाता है

आपके एक्सपोर्ट कागज़ों की ज़्यादातर बातें शिपिंग बिल में जाती हैं। कस्टम्स, आपका बैंक और बाद में खरीदार के देश का कस्टम्स, ये सब इन बातों को आपस में मिलाकर देखते हैं।

  • कौन: आपका IEC और GSTIN, खरीदार, अगर अलग हो तो कंसाइनी, और आपके कस्टम ब्रोकर का लाइसेंस नंबर।
  • कहाँ से कहाँ: लोडिंग पोर्ट, डिस्चार्ज पोर्ट और देश, और आपके बैंक का AD कोड, जो इस निर्यात को आपके बैंक से जोड़ता है।
  • इनवॉइस: कमर्शियल इनवॉइस का नंबर और तारीख़, उसकी करेंसी, Incoterm, और कीमत का बँटवारा: FOB, भाड़ा, बीमा, कमीशन और डिस्काउंट।
  • माल: हर आइटम का विवरण, मात्रा, यूनिट कीमत, HS कोड, पैकेज और वज़न।
  • GST: आप IGST भरकर निर्यात कर रहे हैं, या बॉन्ड या LUT के तहत बिना IGST भरे।
  • स्कीम: हर आइटम पर आप ड्यूटी ड्रॉबैक, RoDTEP या कोई और एक्सपोर्ट बेनिफ़िट क्लेम कर रहे हैं या नहीं।

फ़ाइलिंग से लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर तक

  1. आप या आपका ब्रोकर ICEGATE पर शिपिंग बिल फ़ाइल करते हैं और सपोर्टिंग दस्तावेज़ अपलोड करते हैं, जैसे इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट।
  2. माल शिपिंग बिल में लिखे पोर्ट, एयरपोर्ट या ICD पर पहुँचता है।
  3. कस्टम्स घोषणा जाँचता है। वह माल की जाँच (examination) कर सकता है या सिर्फ़ कागज़ों के आधार पर क्लियर कर सकता है। अगर कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी या सेस बनता है, तो आप उसे भरते हैं।
  4. फिर कस्टम्स, कस्टम्स एक्ट की धारा 51 के तहत, माल क्लियर करने और लादने की इजाज़त का ऑर्डर देता है: यही लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर (LEO) है। यह ICEGATE पर दर्ज होता है और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आपको या आपके ब्रोकर को और माल रखने वाले टर्मिनल को भेजा जाता है।
  5. अब जाकर माल लद सकता है। इसके बाद शिपिंग लाइन या एयरलाइन अपना एक्सपोर्ट मैनिफ़ेस्ट (EGM) कस्टम्स में फ़ाइल करती है।

असेस किया हुआ शिपिंग बिल और उसके पीछे के सारे दस्तावेज़ फ़ाइल करने की तारीख़ से पाँच साल तक रखें। इलेक्ट्रॉनिक शिपिंग बिल के रेगुलेशन यही कहते हैं।

यही फ़ाइलिंग RBI को आपकी घोषणा भी है

1 अक्टूबर 2026 से RBI के Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026 लागू हैं। माल के हर निर्यात को निर्यात के समय Export Declaration Form (EDF) पर घोषित करना होता है। इलेक्ट्रॉनिक (EDI) पोर्ट से जाने वाले माल के लिए EDF शिपिंग बिल का ही हिस्सा माना जाता है, इसलिए अलग से कोई फ़ॉर्म नहीं भरना होता। फिर यह निर्यात EDPMS में दिखता है, जिससे बैंक एक्सपोर्ट पेमेंट पर नज़र रखते हैं।

  • शिपमेंट की तारीख़ से 9 महीने के अंदर पेमेंट पाएँ, या 12 महीने अगर निर्यात रुपये में इनवॉइस या सेटल हुआ है। आपके कारण ठीक लगें तो आपका बैंक और समय दे सकता है।
  • पैसा आने पर आपका बैंक EDPMS की एंट्री बंद करता है। हर शिपिंग बिल पर ₹10 लाख तक, बैंक आपकी इस घोषणा पर एंट्री बंद कर सकता है कि पेमेंट मिल गया।
  • अगर कोई निर्यात अपनी ड्यू डेट (या बढ़ाई गई तारीख़) के एक साल बाद भी अनपेड है, तो आगे आप सिर्फ़ पूरे एडवांस पेमेंट या इर्रिवोकेबल लेटर ऑफ क्रेडिट पर ही निर्यात कर सकते हैं।
उदाहरण: पेमेंट कब तक मिलना चाहिए
  • आप 10 नवंबर 2026 को माल शिप करते हैं और खरीदार को US डॉलर में इनवॉइस करते हैं।
  • शिपमेंट की तारीख़ से नौ महीने: 10 अगस्त 2027 तक पेमेंट मिल जाना चाहिए।
  • अगर इनवॉइस रुपये में होता, तो सीमा 12 महीने होती: 10 नवंबर 2027।

शिपिंग बिल में क्लेम होने वाले एक्सपोर्ट इंसेंटिव

दो स्कीमें वे ड्यूटी और टैक्स लौटाती हैं जो आपके निर्यात के माल में लगे। दोनों शिपिंग बिल में ही एक घोषणा करके क्लेम होती हैं।

  • ड्यूटी ड्रॉबैक माल बनाने में लगे मटीरियल पर भरी कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी लौटाता है, ज़्यादातर उन ऑल इंडस्ट्री रेट्स पर जो सरकार हर प्रोडक्ट के लिए तय करती है। कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक शिपिंग बिल को ही आपका ड्रॉबैक क्लेम मानता है, जो लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर की तारीख़ पर फ़ाइल हुआ माना जाता है, और रकम आपको देता है।
  • RoDTEP इनपुट पर लगी वे ड्यूटी, टैक्स और लेवी लौटाता है जो किसी और स्कीम में वापस नहीं मिलतीं, DGFT के Appendix 4R और 4RE के रेट पर। एक्सपोर्ट मैनिफ़ेस्ट फ़ाइल होने के बाद कस्टम्स क्लेम प्रोसेस करता है और क्रेडिट आपके ICEGATE अकाउंट में आता है। आप इसे e-scrip में बदलते हैं, जिससे आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी भर सकते हैं या जिसे किसी दूसरे IEC होल्डर को ट्रांसफ़र कर सकते हैं।
  • RoDTEP तय अवधि के लिए चलता है। DGFT के 30 सितंबर 2026 के नोटिफ़िकेशन ने इसे 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखा है; उसके बाद की तारीख़ DGFT पर देखें।

ध्यान दें: शिपिंग बिल फ़ाइल होने से पहले तय करें कि कौन से बेनिफ़िट क्लेम करने हैं, अपने ब्रोकर को बताएँ, और ड्राफ़्ट में हर क्लेम चेक करें। फ़ाइलिंग के समय सही करना, बाद में कस्टम्स से शिपिंग बिल को दूसरी स्कीम में बदलवाने से कहीं आसान है।

संक्षेप में

  • शिपिंग बिल आपकी निर्यात घोषणा है, जो आप या आपका कस्टम ब्रोकर ICEGATE पर फ़ाइल करते हैं।
  • सिस्टम से नंबर मिलते ही यह फ़ाइल और सेल्फ़-असेस हुआ माना जाता है।
  • माल कस्टम्स के लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर के बाद ही लदता है।
  • 1 अक्टूबर 2026 से शिपिंग बिल ही RBI के लिए आपका EDF है: 9 महीने में पेमेंट पाएँ, रुपये में इनवॉइस हो तो 12 में।
  • ड्यूटी ड्रॉबैक और RoDTEP शिपिंग बिल में ही क्लेम होते हैं।

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1.शिपिंग बिल फ़ाइल हुआ कब माना जाता है?

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2.1 अक्टूबर 2026 से EDI पोर्ट से माल निर्यात करने वाला RBI की निर्यात घोषणा के लिए क्या फ़ाइल करता है?

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3.RoDTEP कैसे क्लेम होता है?

इस पाठ के शब्द

स्रोत

इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:

ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।