अध्याय 2 · पाठ 145 मिनट

एंटी-डंपिंग, काउंटरवेलिंग और सेफ़गार्ड ड्यूटी

तीन ट्रेड रेमेडी ड्यूटी, इनकी जाँच कौन करता है और कौन लगाता है, और कैसे पता करें कि आपके आयात पर इनमें से कोई लगती है या नहीं।

स्टील कॉइल के दो ढेरों के बीच झुकता तराज़ू और फ़ैक्टरी को बचाती शील्ड।

तीन समस्याएँ, तीन अतिरिक्त ड्यूटी

ट्रेड रेमेडी वे अतिरिक्त आयात ड्यूटी हैं जो भारतीय उत्पादकों को अनुचित या अचानक आई प्रतिस्पर्धा से बचाती हैं। ये सामान्य ड्यूटी के ऊपर लगती हैं, और सिर्फ़ उसी माल पर जिसका वर्णन नोटिफ़िकेशन में है।

  • एंटी-डंपिंग ड्यूटी डंपिंग का जवाब है: माल भारत को उसकी सामान्य कीमत से कम पर बेचा जाए और इससे भारतीय उत्पादकों को नुकसान हो। इसमें देशों के नाम होते हैं, और अक्सर उत्पादकों या निर्यातकों के भी।
  • काउंटरवेलिंग ड्यूटी सब्सिडी का जवाब है: यह उस मदद को बेअसर करती है जो विदेशी सरकार ने निर्यातक को दी। इसमें भी देशों के नाम होते हैं।
  • सेफ़गार्ड ड्यूटी आयात में अचानक आई ऐसी बढ़त का जवाब है जिससे भारतीय उत्पादकों को गंभीर नुकसान हो, भले कोई डंपिंग न हो। यह आम तौर पर सभी देशों से आयात पर लगती है, कुछ विकासशील देशों को छोड़कर।

सेफ़गार्ड ड्यूटी समय के साथ घट भी सकती है। मिसाल के लिए, दिसंबर 2025 में कुछ स्टील फ़्लैट प्रोडक्ट पर नोटिफ़ाई हुई सेफ़गार्ड ड्यूटी पहले साल 12%, फिर 11.5% और फिर 11% रखी गई, और तय CIF कीमत या उससे ऊपर के आयात पर लागू नहीं होनी थी। किसी भी रेट पर भरोसा करने से पहले लाइव नोटिफ़िकेशन देखें।

DGTR जाँच करता है, वित्त मंत्रालय ड्यूटी लगाता है

  1. आम तौर पर भारतीय उत्पादक DGTR को आवेदन देकर केस शुरू करते हैं, जो वाणिज्य मंत्रालय का एक दफ़्तर है।
  2. DGTR जाँच शुरू करता है और विदेशी उत्पादकों, भारतीय आयातकों और प्रोडक्ट के यूज़र्स को प्रश्नावली (questionnaire) भेजता है।
  3. वह प्रारंभिक नतीजे (preliminary findings) देकर अस्थायी ड्यूटी की सिफ़ारिश कर सकता है, फिर अंतिम नतीजे (final findings) में पक्की ड्यूटी की सिफ़ारिश करता है, या कोई सिफ़ारिश नहीं करता।
  4. वित्त मंत्रालय नतीजों पर विचार करता है और ड्यूटी लगानी हो तो कस्टम्स नोटिफ़िकेशन जारी करता है। CBIC इसे प्रकाशित करता है।
  5. ड्यूटी नोटिफ़िकेशन में लिखी अवधि तक चलती है, एंटी-डंपिंग में अक्सर पाँच साल, जब तक पहले हटाई या बदली न जाए। रिव्यू से इसे बढ़ाया, बदला या ख़त्म किया जा सकता है।

ध्यान दें: DGTR का नतीजा एक सिफ़ारिश है, ड्यूटी नहीं। ड्यूटी सिर्फ़ वित्त मंत्रालय का नोटिफ़िकेशन लगाता है, और मंत्रालय तय करता है कि सिफ़ारिश माननी है या नहीं। अपने आयात की कीमत लागू नोटिफ़िकेशन देखकर तय करें, किसी केस की ख़बर देखकर नहीं।

कैसे पता करें कि आपके माल पर लगती है

  1. अपने HS कोड से खोजें, फिर नोटिफ़िकेशन की टेबल में माल का वर्णन पढ़ें। ड्यूटी वर्णित माल पर है; कई नोटिफ़िकेशन कुछ ग्रेड, साइज़ या इस्तेमाल को बाहर रखते हैं।
  2. ओरिजिन वाला देश और निर्यात करने वाला देश, दोनों देखें। टेबल हर जोड़ी के लिए रेट देती है, और किसी तीसरे देश के रास्ते आया माल भी पकड़ में आ सकता है।
  3. उत्पादक और निर्यातक देखें। कुछ नोटिफ़िकेशन नाम वाले उत्पादकों को उनका अपना रेट देते हैं और बाकी सबके लिए अलग रेट तय करते हैं।
  4. तारीख़ें देखें: ड्यूटी तभी तक लगती है जब तक नोटिफ़िकेशन लागू है।
  5. यूनिट और करेंसी देखें। कई एंटी-डंपिंग ड्यूटी प्रति टन या प्रति किलो US डॉलर की तय रकम होती हैं, जो बिल ऑफ एंट्री फ़ाइल करने के दिन के कस्टम्स एक्सचेंज रेट पर रुपये में बदली जाती हैं।

ओरिजिन और उत्पादक के हिसाब से रेट: एक हिसाब

उदाहरण: एक प्रोडक्ट, तीन नतीजे
  • एक नोटिफ़िकेशन देश A के एक नाम वाले उत्पादक पर 40 US डॉलर प्रति टन, और वहाँ के बाकी किसी भी उत्पादक पर 100 US डॉलर प्रति टन एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाता है। सारे आँकड़े सिर्फ़ समझाने के लिए हैं।
  • आप 20 टन आयात करते हैं। बिल ऑफ एंट्री फ़ाइल करने के दिन कस्टम्स एक्सचेंज रेट ₹85 प्रति US डॉलर है।
  • नाम वाले उत्पादक से: 20 × 40 = 800 US डॉलर, यानी ₹68,000।
  • देश A के किसी और उत्पादक से: 20 × 100 = 2,000 US डॉलर, यानी ₹1,70,000।
  • ऐसे देश में बना माल जिसका नोटिफ़िकेशन में नाम नहीं: कोई एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं, पर सामान्य ड्यूटी लगती रहेगी।

नाम वाले उत्पादक का रेट तभी मिलता है जब आपका माल टेबल की उसी लाइन से मेल खाए, इसलिए सप्लायर से पूछें कि माल किसने बनाया और इसका सबूत रखें।

नज़र कहाँ रखें

  • DGTR नई जाँच, नतीजे और रिव्यू dgtr.gov.in पर प्रकाशित करता है। प्रोडक्ट के यूज़र भी केस में हिस्सा ले सकते हैं।
  • DGTR के केस में सनसेट रिव्यू भी होते हैं, जो देखते हैं कि ख़त्म हो रही ड्यूटी आगे जारी रहे या नहीं, और एंटी-सर्कमवेंशन केस, जो देखते हैं कि कहीं ड्यूटी से बचा तो नहीं जा रहा।
  • ड्यूटी ख़ुद वित्त मंत्रालय के नोटिफ़िकेशन में होती है, जिन्हें CBIC प्रकाशित करता है।
  • निर्यातक के रूप में, विदेश में आप पर भी ऐसी ड्यूटी लग सकती है। दूसरे देश जब भारतीय निर्यातकों पर केस करते हैं, तो DGTR उनकी मदद भी करता है।

संक्षेप में

  • एंटी-डंपिंग ड्यूटी डंपिंग का, काउंटरवेलिंग ड्यूटी सब्सिडी का, और सेफ़गार्ड ड्यूटी आयात में अचानक बढ़त का जवाब है।
  • DGTR जाँच करके सिफ़ारिश करता है; वित्त मंत्रालय फ़ैसला करके नोटिफ़िकेशन से ड्यूटी लगाता है।
  • ड्यूटी सिर्फ़ उसी माल, देश, उत्पादक और तारीख़ों पर लगती है जो उसके नोटिफ़िकेशन में लिखे हैं।
  • कई एंटी-डंपिंग ड्यूटी प्रति यूनिट US डॉलर की तय रकम होती हैं, जो कस्टम्स एक्सचेंज रेट पर रुपये में बदलती हैं।

हमारे डेटा पर आज़माएँ

ख़ुद को जाँचें

ख़ुद को जाँचें 1

1.भारत में एंटी-डंपिंग ड्यूटी कौन लगाता है?

ख़ुद को जाँचें 2

2.सेफ़गार्ड ड्यूटी किसके ख़िलाफ़ होती है?

ख़ुद को जाँचें 3

3.एक नोटिफ़िकेशन 50 US डॉलर प्रति टन तय करता है। आप 10 टन आयात करते हैं और कस्टम्स एक्सचेंज रेट ₹80 प्रति डॉलर है। एंटी-डंपिंग ड्यूटी कितनी होगी? (आँकड़े सिर्फ़ समझाने के लिए।)

इस पाठ के शब्द

स्रोत

इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:

ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।