
आयात पर आप क्या भरते हैं
माल भारत आता है तो कस्टम्स एक ही बिल ऑफ एंट्री पर कई रकमें लेता है। ये एक के बाद एक निकलती हैं, और हर रकम का आधार पिछली रकमों को जोड़कर बनता है। शुरुआत असेसेबल वैल्यू से होती है: आम तौर पर रुपये में बदली हुई CIF कीमत।
- बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD): मुख्य ड्यूटी, कस्टम्स टैरिफ़ में हर 8 अंक के कोड के लिए तय।
- सोशल वेलफ़ेयर सरचार्ज (SWS): कस्टम ड्यूटी पर निकलता है, माल की कीमत पर नहीं।
- AIDC: एक सेस, जो सिर्फ़ कुछ गिने-चुने माल पर लगता है।
- IGST: आयात पर GST, जो सबसे आख़िर में, कीमत और कस्टम ड्यूटी जोड़कर निकलता है।
- कुछ माल पर, अक्सर सिर्फ़ कुछ ख़ास देशों से आने पर, एंटी-डंपिंग ड्यूटी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी या सेफ़गार्ड ड्यूटी भी।
हिसाब का क्रम
- असेसेबल वैल्यू (AV): कस्टम्स एक्सचेंज रेट पर रुपये में बदली CIF कीमत।
- BCD = AV × BCD रेट। ज़्यादातर रेट प्रतिशत में होते हैं; कुछ प्रति यूनिट रकम में, या दोनों में से जो ज़्यादा हो।
- SWS: CBIC का सर्कुलर 03/2022-Customs कहता है कि SWS कुल देय कस्टम ड्यूटी का 10% है, कीमत का नहीं। छूट की वजह से वह ड्यूटी शून्य हो तो SWS भी शून्य। कुछ माल पर SWS की छूट है।
- IGST: कस्टम्स टैरिफ़ एक्ट की धारा 3(8) के अनुसार IGST, AV में BCD, SWS और माल पर लगी कोई भी दूसरी कस्टम ड्यूटी जोड़कर उस पर लगता है। IGST ख़ुद इस आधार में नहीं जुड़ता।
- कुल भुगतान = BCD + SWS + कोई दूसरी कस्टम ड्यूटी + IGST।
- असेसेबल वैल्यू: ₹10,00,000। समझाने के लिए रेट: BCD 10%, IGST 18%। ये किसी असली प्रोडक्ट के रेट नहीं हैं।
- BCD: ₹10,00,000 का 10% = ₹1,00,000।
- SWS: ₹1,00,000 का 10% = ₹10,000।
- IGST के लिए कीमत: ₹10,00,000 + ₹1,00,000 + ₹10,000 = ₹11,10,000।
- IGST: ₹11,10,000 का 18% = ₹1,99,800।
- कुल भुगतान: ₹1,00,000 + ₹10,000 + ₹1,99,800 = ₹3,09,800।
- इसमें से ₹1,99,800 का IGST आम तौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में वापस मिल सकता है; BCD और SWS के ₹1,10,000 नहीं।
छूट: टैरिफ़ रेट अक्सर वह नहीं जो आप भरते हैं
टैरिफ़ में छपा रेट स्टैच्युटरी रेट है। कस्टम्स एक्ट की धारा 25 सरकार को छूट नोटिफ़िकेशन से इसे पूरा या कुछ घटाने देती है, कभी-कभी सिर्फ़ तब जब आप शर्तें पूरी करें। 1 नवंबर 2025 से कई आम छूटें एक ही नोटिफ़िकेशन, 45/2025-Customs, में हैं, जिसने 50/2017-Customs समेत 31 पुराने नोटिफ़िकेशन की जगह ली। यह कई माल पर कस्टम ड्यूटी और IGST के इफ़ेक्टिव रेट तय करता है।
AIDC भी इसी तरह चलता है। 2021 में जब यह शुरू हुआ, बजट ने इसके दायरे वाले ज़्यादातर माल पर BCD घटा दी ताकि कुल ड्यूटी लगभग उतनी ही रहे, और AIDC के इफ़ेक्टिव रेट एक अलग नोटिफ़िकेशन तय करता है।
ध्यान दें: आम गलती है सिर्फ़ टैरिफ़ रेट से, या किसी पुराने बिल ऑफ एंट्री के रेट से सौदे की कीमत तय करना। छूटें नोटिफ़िकेशन से बदलती हैं, और कुछ में ऐसी शर्तें होती हैं जो आपको साबित करनी पड़ती हैं, जैसे माल का इस्तेमाल कहाँ होगा। फ़ाइल करने के दिन अपने सही कोड का इफ़ेक्टिव रेट देखें।
ट्रेड एग्रीमेंट से कम ड्यूटी
अगर आपका माल जिस देश से आ रहा है उसके साथ भारत का ट्रेड एग्रीमेंट है, तो प्रेफ़रेंशियल रेट आम MFN रेट से कम हो सकता है। कस्टम्स (एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ रूल्स ऑफ़ ओरिजिन अंडर ट्रेड एग्रीमेंट्स) रूल्स, 2020 के तहत इसे बिल ऑफ एंट्री में क्लेम करते हैं: आप घोषणा करते हैं कि माल योग्य है, हर आइटम के लिए टैरिफ़ नोटिफ़िकेशन बताते हैं, और सर्टिफ़िकेट ऑफ़ ओरिजिन देते हैं।
आपके पास यह जानकारी भी होनी चाहिए कि माल एग्रीमेंट के रूल्स ऑफ़ ओरिजिन कैसे पूरे करता है, और इसे पाँच साल रखना होता है। सर्टिफ़िकेट अधूरा हो, बिना प्रमाणित किए बदला गया हो, या उसकी वैधता ख़त्म हो चुकी हो, तो कस्टम्स बिना आगे जाँच के क्लेम ठुकरा सकता है।
क्या वापस मिलता है
आयात पर भरा IGST, GST ही है। GST में रजिस्टर्ड आयातक आम तौर पर इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में ले सकता है: CGST रूल्स का रूल 36 बिल ऑफ एंट्री के आधार पर क्रेडिट लेने देता है। BCD, SWS और AIDC कस्टम ड्यूटी हैं, GST नहीं, इसलिए ये आपकी लागत में ही रहते हैं।
इसीलिए भारत में माल बेचने वाले आयातक दो आँकड़े देखते हैं: पोर्ट पर कितना नकद भरना है, और क्रेडिट के बाद कितनी लागत उनके पास रह जाती है।
संक्षेप में
- BCD असेसेबल वैल्यू पर, SWS कस्टम ड्यूटी पर, और IGST सबसे आख़िर में कीमत और ड्यूटी जोड़कर निकलता है।
- SWS कस्टम ड्यूटी का 10% है, माल की कीमत का नहीं, और वह ड्यूटी शून्य हो तो SWS भी शून्य।
- टैरिफ़ रेट अक्सर वह नहीं जो आप भरते हैं: छूट नोटिफ़िकेशन कम इफ़ेक्टिव रेट तय करते हैं।
- प्रेफ़रेंशियल रेट के लिए सर्टिफ़िकेट ऑफ़ ओरिजिन और रूल्स ऑफ़ ओरिजिन पूरे होने का सबूत चाहिए।
- IGST आम तौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट में वापस मिलता है; BCD, SWS और AIDC नहीं।
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इस पाठ के शब्द
स्रोत
- CBIC: Circular 03/2022-Customs, how Social Welfare Surcharge is calculated
- CBIC: Notification 45/2025-Customs, effective rates of customs duty and IGST (in force from 1 November 2025)
- CBIC Tax Information Portal: Customs Tariff Act 1975, section 3(7) and 3(8) (IGST on imports); Customs Act 1962, section 25; CGST Rules 2017, rule 36; Customs (Administration of Rules of Origin under Trade Agreements) Rules, 2020
- Union Budget 2021-22: Budget speech and annex, Agriculture Infrastructure and Development Cess
इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:
ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।