
बिल ऑफ एंट्री के तीन प्रकार
बिल ऑफ एंट्री आयात किए माल के बारे में कस्टम्स को दी गई आपकी घोषणा है। बिल ऑफ एंट्री (फ़ॉर्म्स) रेगुलेशन्स, 1976 इसके तीन प्रकार बताते हैं:
- होम कंज़म्पशन के लिए: आप माल भारत में क्लियर करते हैं और ड्यूटी अभी भरते हैं।
- वेयरहाउसिंग के लिए: माल कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में जाता है और ड्यूटी तब तक रुकी रहती है जब तक आप माल निकालते नहीं।
- एक्स-बॉन्ड: आप वेयरहाउस से माल होम कंज़म्पशन के लिए निकालते हैं और तब ड्यूटी भरते हैं।
कस्टम्स एक्ट की धारा 46 कहती है कि बिल ऑफ एंट्री कस्टम्स के ऑटोमेटेड सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से दिया जाता है। आप ICEGATE पर रजिस्टर करके इसे ख़ुद फ़ाइल कर सकते हैं, या लाइसेंस वाला कस्टम ब्रोकर डिजिटल साइन के साथ आपकी तरफ़ से फ़ाइल करता है। कस्टम्स का सर्विस सेंटर भी इसे भर सकता है।
कब फ़ाइल करें
क़ानून चाहता है कि बिल ऑफ एंट्री माल पहुँचने से पहले फ़ाइल हो। धारा 46(3) के अनुसार आप अनुमानित आगमन से 30 दिन पहले तक फ़ाइल कर सकते हैं। आख़िरी समय नोटिफ़िकेशन 34/2021-Customs (N.T.) तय करता है:
- समुद्री पोर्ट: जहाज़ पहुँचने से पिछले दिन के ख़त्म होने तक, छुट्टी हो तब भी। कुछ पड़ोसी देशों से आए माल के लिए, पहुँचने वाले दिन के ख़त्म होने तक।
- एयरपोर्ट: हवाई जहाज़ पहुँचने वाले दिन के ख़त्म होने तक।
- ICD (इनलैंड कंटेनर डिपो) या एयर फ़्रेट स्टेशन: माल लाने वाली गाड़ी या ट्रेन पहुँचने से पिछले दिन के ख़त्म होने तक।
- लैंड कस्टम्स स्टेशन: गाड़ी पहुँचने वाले दिन के ख़त्म होने तक।
बिना ठोस वजह के देर से फ़ाइल करें तो कस्टम्स आपसे लेट प्रेज़ेंटेशन चार्ज ले सकता है।
- जहाज़ के एक समुद्री पोर्ट पर 30 जून को पहुँचने का अनुमान है।
- सबसे पहले कब फ़ाइल कर सकते हैं: अनुमानित आगमन से 30 दिन पहले, यानी 31 मई को।
- लेट चार्ज से बचने की आख़िरी सीमा: 29 जून ख़त्म होने तक, भले ही 29 जून को छुट्टी हो।
- डेडलाइन जहाज़ के असल में पहुँचने के दिन से चलती है, इसलिए जहाज़ जल्दी आए तो डेडलाइन भी जल्दी आ जाती है। कागज़ तैयार होते ही फ़ाइल करें।
कौन से दस्तावेज़ तैयार रखें
धारा 46(4) इनवॉइस और लागू होने वाले दूसरे दस्तावेज़ माँगती है। आप इन्हें ICEGATE के दस्तावेज़ स्टोर e-Sanchit पर डिजिटल साइन वाली PDF के रूप में अपलोड करते हैं, और हर दस्तावेज़ का रेफ़रेंस नंबर (IRN) बिल ऑफ एंट्री में भरते हैं। आम तौर पर ये चाहिए:
- कमर्शियल इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट।
- बिल ऑफ लैडिंग या एयर वे बिल।
- कीमत के सबूत के लिए भाड़े और बीमे के कागज़, परचेज़ ऑर्डर या कॉन्ट्रैक्ट, और पेमेंट का सबूत।
- ट्रेड एग्रीमेंट में कम ड्यूटी क्लेम करें तो सर्टिफ़िकेट ऑफ़ ओरिजिन।
- प्रोडक्ट को जो भी लाइसेंस, सर्टिफ़िकेट या रजिस्ट्रेशन चाहिए, जैसे BIS लाइसेंस, वह फ़ाइल करने से पहले लिया हुआ।
- जिस माल का विवरण पढ़कर यह साफ़ न हो कि वह क्या है और किस काम आता है, उसका कैटलॉग या टेक्निकल राइट-अप।
ध्यान दें: कई बिल ऑफ एंट्री सिर्फ़ बिल ऑफ लैडिंग या एयर वे बिल के साथ फ़ाइल हो जाते हैं। बेंगलुरु एयर कार्गो कस्टम्स ने पब्लिक नोटिस 15/2025 में कहा कि इससे अफ़सरों को क्वेरी उठानी पड़ती है और क्लीयरेंस धीमा होता है। पहली फ़ाइलिंग के साथ ही हर सपोर्टिंग दस्तावेज़ अपलोड करें, हर एक को बिल ऑफ एंट्री से जोड़ें, और माल का पूरा विवरण दें, यह भी कि वह किस काम आता है।
फ़ाइलिंग से आउट ऑफ चार्ज तक
- फ़ाइल: ICEGATE घोषणा मान ले और बिल ऑफ एंट्री नंबर दे दे, तो वह फ़ाइल और सेल्फ़-असेस्ड माना जाता है। कस्टम्स एक्ट की धारा 17 के तहत अपनी ड्यूटी का असेसमेंट आप ख़ुद करते हैं।
- रिस्क जाँच: कस्टम्स का सिस्टम, ज़्यादातर रिस्क के आधार पर, तय करता है कि कोई अफ़सर असेसमेंट जाँचेगा, माल की जाँच होगी, या दोनों। कई बिल ऑफ एंट्री में दोनों में से कुछ नहीं होता।
- असेसमेंट: 2020 से असेसमेंट फ़ेसलेस है, इसलिए आपका क्लासिफ़िकेशन, कीमत और छूट जाँचने वाला अफ़सर किसी दूसरे शहर में बैठा हो सकता है। अफ़सर क्वेरी उठा सकता है या दोबारा असेसमेंट कर सकता है। आप दोबारा असेसमेंट लिखित में न मानें, तो अफ़सर को 15 दिन में स्पीकिंग ऑर्डर देना होता है।
- ड्यूटी: ICEGATE से ऑनलाइन भरें। कस्टम्स एक्ट भुगतान की छोटी समय-सीमा तय करता है और देर होने पर ब्याज लेता है, इसलिए माल पहुँचने से पहले पैसा तैयार रखें।
- जाँच: आपका माल चुना जाए तो कस्टम्स पोर्ट, CFS या ICD पर उसकी जाँच करता है, अक्सर सिर्फ़ एक नमूने की।
- आउट ऑफ चार्ज: कस्टम्स क्लीयरेंस की मंज़ूरी का ऑर्डर सिस्टम पर दर्ज करता है और आपको और माल के कस्टोडियन को भेजता है। इसके बाद माल कस्टम्स के कंट्रोल से बाहर जा सकता है।
क्लीयरेंस के बाद
असेस्ड बिल ऑफ एंट्री और हर सपोर्टिंग दस्तावेज़ पाँच साल रखें। रेगुलेशन्स में यह ज़रूरी है, और कस्टम्स बाद में इन्हें माँग सकता है। GST में रजिस्टर्ड आयातक को भरे गए IGST का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए भी बिल ऑफ एंट्री चाहिए।
संक्षेप में
- बिल ऑफ एंट्री तीन तरह के होते हैं: होम कंज़म्पशन, वेयरहाउसिंग और एक्स-बॉन्ड।
- माल पहुँचने से पहले फ़ाइल करें: 30 दिन पहले तक, और समुद्री पोर्ट पर आगमन से पिछले दिन के ख़त्म होने तक।
- पहली फ़ाइलिंग के साथ ही हर सपोर्टिंग दस्तावेज़ e-Sanchit पर अपलोड करें और बिल ऑफ एंट्री से जोड़ें।
- असेसमेंट आप ख़ुद करते हैं; कस्टम्स रिस्क के हिसाब से जाँचता है, माल देख सकता है, फिर आउट ऑफ चार्ज देता है।
- बिल ऑफ एंट्री और दस्तावेज़ पाँच साल रखें।
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इस पाठ के शब्द
स्रोत
- CBIC Tax Information Portal: Customs Act 1962, sections 17, 46 and 47; Bill of Entry (Forms) Regulations, 1976; Bill of Entry (Electronic Integrated Declaration and Paperless Processing) Regulations, 2018
- CBIC: Notification 34/2021-Customs (N.T.), time limits for filing a bill of entry
- CBIC: Circular 40/2020-Customs, all-India roll-out of faceless assessment
- Bengaluru Air Cargo Customs: Public Notice 15/2025, documents for faster faceless assessment
- ICEGATE: eSANCHIT frequently asked questions
इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:
ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।