अध्याय 2 · पाठ 154 मिनट

BIS सर्टिफ़िकेशन और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर

क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर क्या है, किन प्रोडक्ट पर BIS मार्क ज़रूरी है, आयातक और उसके विदेशी सप्लायर के लिए इसका मतलब, और कैसे जाँचें।

लैब की मेज़ पर केतली और खिलौना, चेकलिस्ट और क्वालिटी मुहर के साथ।

क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर क्या है

BIS (ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स) भारतीय मानक (Indian Standards) बनाता है और प्रोडक्ट को उनके हिसाब से सर्टिफ़ाई करता है। ज़्यादातर प्रोडक्ट के लिए यह सर्टिफ़िकेशन अपनी मर्ज़ी का है। कुछ प्रोडक्ट के लिए केंद्र सरकार मानक को ज़रूरी बना देती है, सेहत, सुरक्षा, पर्यावरण, अनुचित व्यापार रोकने या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कारणों से।

यह काम क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) से होता है। हर ऑर्डर उस प्रोडक्ट का ज़िम्मेदार मंत्रालय जारी करता है, जैसे स्टील के लिए स्टील मंत्रालय। इसमें प्रोडक्ट, हर प्रोडक्ट को पूरा करने वाला भारतीय मानक, और लागू होने की तारीख़ लिखी होती है।

ऑर्डर लागू होने के बाद प्रोडक्ट पर BIS का स्टैंडर्ड मार्क होना ज़रूरी है, BIS के लाइसेंस या सर्टिफ़िकेट के तहत। यह नियम आयात पर भी उतना ही लागू है जितना भारत में बने माल पर।

किन प्रोडक्ट को चाहिए

BIS अपनी वेबसाइट पर ज़रूरी सर्टिफ़िकेशन वाले प्रोडक्ट की लिस्ट प्रकाशित करता है। इसमें सीमेंट, स्टील और एल्युमिनियम प्रोडक्ट, खिलौने, हेलमेट और प्रेशर कुकर जैसे प्रोडक्ट हैं। हर प्रोडक्ट के आगे लिस्ट में भारतीय मानक और उसके पीछे के ऑर्डर दिखते हैं: मूल ऑर्डर, और उसमें हुआ कोई भी बदलाव, टालना, रोकना या वापसी।

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय (MeitY) के नोटिफ़ाई किए इलेक्ट्रॉनिक्स और IT सामान का रास्ता अलग है: BIS की कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन स्कीम (CRS)। DGFT की आयात नीति कहती है कि ऐसा सामान तब तक आयात नहीं हो सकता जब तक वह BIS में रजिस्टर्ड न हो और उस पर BIS के नियम के मुताबिक लेबल न हो। अगर ऐसा सामान बिना रजिस्ट्रेशन पोर्ट पर पहुँचे, तो आयातक को उसे वापस भेजना (re-export) होगा; नहीं तो कस्टम्स उसे बेकार करके स्क्रैप के रूप में निपटा देता है।

यह लिस्ट अक्सर बदलती है। ऑर्डर बदले, टाले, रोके या वापस लिए जाते हैं, और कुछ में छोटे और सूक्ष्म (micro) उद्योगों को बाकी सबसे बाद की तारीख़ मिलती है। स्टेटस उस दिन देखें जिस दिन माल शिप हो रहा है, उस दिन नहीं जब आपने ऑर्डर के बारे में सुना था।

ध्यान दें: ज़्यादातर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर में HS कोड नहीं होते। उनमें प्रोडक्ट और भारतीय मानक के नाम होते हैं, इसलिए सिर्फ़ HS कोड से खोजने पर आपके माल वाला ऑर्डर छूट सकता है। अपने प्रोडक्ट को हर ऑर्डर के वर्णन और मानक से मिलाकर देखें।

आयातकों के लिए इसका मतलब

DGFT की आयात नीति कहती है कि आयातित माल को वही घरेलू कानून, तकनीकी मानक और सुरक्षा नियम पूरे करने होंगे जो भारत में बने माल पर लागू हैं। QCO वाले प्रोडक्ट के लिए इसका मतलब है कि माल शिप होने से पहले विदेशी फ़ैक्ट्री के पास BIS सर्टिफ़िकेशन होना चाहिए।

  • आवेदन विदेशी निर्माता करता है, BIS की फ़ॉरेन मैन्युफ़ैक्चरर्स सर्टिफ़िकेशन स्कीम (FMCS) के तहत। आयातक उसकी तरफ़ से आवेदन नहीं कर सकता।
  • हर प्रोडक्ट और हर फ़ैक्ट्री का अलग आवेदन होता है। जो सप्लायर दो फ़ैक्ट्रियों में प्रोडक्ट बनाता है, उसे दोनों के लिए आवेदन करना होगा।
  • निर्माता भारत में रहने वाले एक ऑथराइज़्ड इंडियन रिप्रेज़ेंटेटिव (AIR) को नामित करता है, जो लाइसेंस के लिए BIS के सामने ज़िम्मेदार होता है। AIR का नाम लाइसेंस पर लिखा होता है, और उसे कंसाइनमेंट से मार्केट सैंपल लेने में BIS की मदद करनी होती है।
  • लाइसेंस उस फ़ैक्ट्री में बने प्रोडक्ट के लिए होता है। वहीं बना कोई दूसरा ब्रांड एक अंडरटेकिंग देकर जुड़ता है, नए आवेदन से नहीं।
  • BIS सिर्फ़ भारतीय मानक के हिसाब से बनी टेस्ट रिपोर्ट मानता है, विदेशी मानक वाली नहीं।
  • BIS के अनुसार पूरा आवेदन मिलने के बाद लाइसेंस में औसतन करीब छह महीने लगते हैं, इसलिए पहले से योजना बनाएँ।

अपना प्रोडक्ट कैसे जाँचें

  1. अपने प्रोडक्ट का सही वर्णन और 8 अंकों का HS कोड लिख लें।
  2. BIS की ज़रूरी सर्टिफ़िकेशन वाली लिस्ट में प्रोडक्ट के नाम और भारतीय मानक से खोजें, सिर्फ़ कोड से नहीं।
  3. ऑर्डर ख़ुद पढ़ें: प्रोडक्ट का वर्णन, IS नंबर, कोई छूट, और तारीख़ें, जिनमें छोटे और सूक्ष्म उद्योगों की बाद वाली तारीख़ें भी शामिल हैं।
  4. आज का स्टेटस देखें: लागू, नोटिफ़ाई हुआ पर अभी लागू नहीं, टला हुआ, रुका हुआ या वापस लिया गया।
  5. अगर लागू है, तो ऑर्डर देने से पहले सप्लायर से उसका BIS लाइसेंस या CRS रजिस्ट्रेशन नंबर माँगें, और BIS पर उसकी जाँच करें।

हमारा BIS टूल हर दिन BIS की लिस्ट पढ़ता है और हर ऑर्डर का स्टेटस दिखाता है, पर कानूनी तौर पर गज़ट में छपा ऑर्डर ही असली टेक्स्ट है।

संक्षेप में

  • ज़्यादातर प्रोडक्ट के लिए BIS सर्टिफ़िकेशन अपनी मर्ज़ी का है, पर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर अपनी लिस्ट के प्रोडक्ट के लिए इसे ज़रूरी बना देता है।
  • QCO वाले आयात पर BIS का स्टैंडर्ड मार्क चाहिए, विदेशी निर्माता के अपने लाइसेंस के तहत।
  • आवेदन सिर्फ़ विदेशी निर्माता कर सकता है, हर प्रोडक्ट और फ़ैक्ट्री के लिए अलग, और उसे भारत में एक रिप्रेज़ेंटेटिव नामित करना होता है।
  • ज़्यादातर QCO में प्रोडक्ट और मानक होते हैं, HS कोड नहीं, और उनकी तारीख़ें अक्सर बदलती हैं: आज का स्टेटस देखें।

हमारे डेटा पर आज़माएँ

ख़ुद को जाँचें

ख़ुद को जाँचें 1

1.QCO वाले आयातित प्रोडक्ट के लिए BIS लाइसेंस का आवेदन कौन करता है?

ख़ुद को जाँचें 2

2.सिर्फ़ HS कोड से खोजने पर कोई क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर क्यों छूट सकता है?

ख़ुद को जाँचें 3

3.एक सप्लायर एक ही प्रोडक्ट दो फ़ैक्ट्रियों में बनाता है। BIS को क्या चाहिए?

इस पाठ के शब्द

स्रोत

इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:

ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।