
1 अक्टूबर 2026 से नए नियम
RBI के Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026, नोटिफ़िकेशन FEMA 23(R)/2026-RB, 1 अक्टूबर 2026 से लागू हुए। उसी दिन बैंकों के लिए RBI के निर्देश, A.P. (DIR Series) Circular No. 20, भी लागू हुए और उन्होंने एक्सपोर्ट व इम्पोर्ट के पुराने मास्टर डायरेक्शन की जगह ले ली।
ये नियम 1 अक्टूबर 2026 या उसके बाद हुए निर्यात और आयात पर लागू हैं। उससे पहले वाले 2015 के नियमों, FEMA 23(R)/2015-RB, के तहत ही रहेंगे, इसलिए पुरानी शिपमेंट के बारे में अपने बैंक से पूछें।
अपने एक्सपोर्ट की घोषणा
- माल: हर एक्सपोर्ट को एक्सपोर्ट के समय एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फ़ॉर्म (EDF) पर घोषित करें। कस्टम्स के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम वाले पोर्ट पर शिपिंग बिल ही आपका EDF माना जाता है। SEZ यूनिट अपने डेवलपमेंट कमिश्नर को घोषणा करती है।
- सर्विस और सॉफ़्टवेयर: जिस महीने इनवॉइस बना, उस महीने के ख़त्म होने के 30 दिन के अंदर EDF फ़ाइल करें। एक EDF पूरे महीने को कवर कर सकता है। सर्विस की घोषणा बैंक को होती है, सॉफ़्टवेयर की बैंक या STPI को।
- सॉफ़्टवेयर के अलावा बाकी सर्विस: चाहें तो पेमेंट आने के दिन या उससे पहले भी EDF फ़ाइल कर सकते हैं।
- देर हो गई? वजह ठीक लगे तो आपका बैंक ज़्यादा समय दे सकता है।
- सैंपल, गिफ़्ट और रिपेयर के लिए भेजे माल को अब EDF से छूट नहीं है। छूट सिर्फ़ यात्री के निजी सामान को है।
पेमेंट की आख़िरी तारीख़
- एक्सपोर्ट की पूरी कीमत 9 महीने के अंदर लें: माल के लिए शिपमेंट की तारीख़ से, और सर्विस व सॉफ़्टवेयर के लिए इनवॉइस की तारीख़ से।
- अगर एक्सपोर्ट का इनवॉइस या सेटलमेंट रुपये में है, तो 12 महीने मिलते हैं।
- विदेश के वेयरहाउस में भेजा माल: वेयरहाउस से बिकने के दिन से 9 महीने, रुपये में हो तो 12। प्रोजेक्ट एक्सपोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट की पेमेंट शर्तें चलती हैं।
- देरी की वजह बताने पर, अगर बैंक संतुष्ट हो, तो वह समय-सीमा बढ़ा सकता है।
- ड्यू डेट, या बढ़ाई गई तारीख़, के एक साल बाद भी पेमेंट नहीं आया? तब से आप सिर्फ़ पूरे एडवांस या इर्रिवोकेबल लेटर ऑफ क्रेडिट के बदले ही एक्सपोर्ट कर सकते हैं।
- 15 अक्टूबर 2026 को भेजा माल, इनवॉइस अमेरिकी डॉलर में: 9 महीने बाद, 15 जुलाई 2027 तक पेमेंट लें।
- वही माल, इनवॉइस रुपये में: 12 महीने बाद, 15 अक्टूबर 2027 तक पेमेंट लें।
- अगर डॉलर वाला एक्सपोर्ट 15 जुलाई 2028 के बाद भी अनपेड है, यानी ड्यू डेट के एक साल बाद, तो आगे के एक्सपोर्ट के लिए पूरा एडवांस या इर्रिवोकेबल लेटर ऑफ क्रेडिट चाहिए।
- 10 नवंबर 2026 को इनवॉइस की गई सर्विस: नवंबर ख़त्म होने के 30 दिन बाद, यानी 30 दिसंबर 2026 तक EDF फ़ाइल करें, और 10 अगस्त 2027 तक पेमेंट लें।
- ये तारीख़ें सिर्फ़ उदाहरण हैं। हमारा पेमेंट डेडलाइन टूल आपकी तारीख़ के हिसाब से इन्हें निकालता है।
ध्यान दें: घड़ी शिपमेंट या इनवॉइस की तारीख़ से चलती है, खरीदार को माल मिलने से नहीं। एक्सटेंशन अपने-आप नहीं मिलता: बैंक तभी देता है जब आप वजह के साथ माँगें। जैसे ही पता चले कि पेमेंट देर से आएगा, बैंक से बात करें।
छोटी रकम, सेट-ऑफ़ और थर्ड पार्टी
- हर शिपिंग बिल या इनवॉइस पर ₹10 लाख तक, आपकी अपनी घोषणा पर कि पेमेंट मिल गया, पूरा या किसी और तरह, बैंक EDPMS की एंट्री बंद कर सकता है। कई एंट्री के लिए तिमाही में एक बार भी घोषणा दे सकते हैं।
- एक्सपोर्ट की कीमत से कम पैसा मिला? बैंक आपकी वजह से संतुष्ट हो तो कम रकम मान सकता है। हर शिपिंग बिल या इनवॉइस पर ₹10 लाख तक आपकी घोषणा काफ़ी है।
- सेट-ऑफ़: बैंक इजाज़त दे सकता है कि एक ही विदेशी खरीदार या सप्लायर, या उसकी ग्रुप या एसोसिएट कंपनियों के साथ, एक्सपोर्ट की लेनदारी को इम्पोर्ट की देनदारी से, पेमेंट की समय-सीमा के अंदर, बराबर कर लें।
- थर्ड पार्टी: डील असली होने का भरोसा हो तो बैंक किसी तीसरी पार्टी से आपको पेमेंट, या आपसे तीसरी पार्टी को पेमेंट, की इजाज़त दे सकता है।
- एडवांस: एक्सपोर्ट का एडवांस और बाकी पेमेंट एक ही बैंक से लें। बैंक बदलना हो तो दोनों को बताएँ।
आयात का पेमेंट
- कॉन्ट्रैक्ट में लिखी अवधि के अंदर पेमेंट करें। देरी की वजह बताने पर बैंक यह अवधि बढ़ा सकता है।
- एडवांस की इजाज़त आपका बैंक तय करता है, और ऐसी रकम तय कर सकता है जिसके ऊपर वह स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट या बैंक गारंटी माँगे।
- सोने या चाँदी के आयात के लिए एडवांस पेमेंट की इजाज़त नहीं है।
- अगर कॉन्ट्रैक्ट की अवधि में आयात नहीं हुआ, तो एडवांस भारत वापस लाएँ। न लाए, तो आगे हर इम्पोर्ट एडवांस के लिए बिना शर्त, इर्रिवोकेबल स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट या किसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंक की गारंटी चाहिए होगी।
- हर बिल ऑफ एंट्री या इनवॉइस पर ₹10 लाख तक, आपकी घोषणा पर बैंक IDPMS की एंट्री बंद कर सकता है। IDPMS, RBI का आयात वाला सिस्टम है, EDPMS का जोड़ीदार।
1 अक्टूबर 2026 को क्या बदला
- पेमेंट के लिए 9 महीने, रुपये में 12। RBI ने जनवरी 2026 में जो नियम छापे थे उनमें 15 और 18 महीने थे; 22 सितंबर 2026 के संशोधन ने लागू होने से पहले ही इन्हें घटा दिया।
- फ़्री-ऑफ़-कॉस्ट एक्सपोर्ट को EDF से छूट नहीं: RBI ने वह सर्कुलर वापस ले लिया जिससे यह छूट मिलती थी।
- इम्पोर्ट एडवांस के लिए USD 200,000 की तय सीमा नहीं रही: अब हर बैंक खुद तय करता है कि किस रकम के ऊपर वह स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट या गारंटी माँगेगा।
- नया: EDPMS और IDPMS की एंट्री बंद करने के लिए ₹10 लाख तक घोषणा वाला रास्ता।
- 1 अक्टूबर 2026 से पहले के जिन मामलों में 2015 के नियमों के तहत RBI की मंज़ूरी चाहिए थी, उन्हें अब आपका बैंक देखता है।
संक्षेप में
- FEMA 2026 के नियम 1 अक्टूबर 2026 से हुए निर्यात और आयात पर लागू हैं; पुराने मामले 2015 के नियमों में रहते हैं।
- माल की घोषणा शिपिंग बिल से होती है; सर्विस और सॉफ़्टवेयर की, इनवॉइस वाले महीने के बाद 30 दिन के अंदर EDF से।
- शिपमेंट या इनवॉइस के 9 महीने में पेमेंट लें, या रुपये में इनवॉइस या सेटलमेंट हो तो 12 महीने में। बैंक यह समय बढ़ा सकता है।
- ड्यू डेट के एक साल बाद भी अनपेड: आगे के एक्सपोर्ट सिर्फ़ पूरे एडवांस या इर्रिवोकेबल LC पर।
- आयात का पेमेंट कॉन्ट्रैक्ट की अवधि में करें; एडवांस पर फ़ैसला आपका बैंक करता है।
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इस पाठ के शब्द
स्रोत
- RBI: FEMA 23(R)/2026-RB, Export and Import of Goods and Services Regulations, 2026
- RBI: FEMA 23(R)/(1)/2026-RB, amendment of 22 September 2026
- RBI: A.P. (DIR Series) Circular No. 20 of 16 January 2026
इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:
ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।