अध्याय 1 · पाठ 64 मिनट

विदेश में पहले खरीदार कैसे खोजें

ट्रेड आंकड़ों से बाज़ार चुनें, कस्टम्स रिकॉर्ड में आयातक खोजें, मेलों और अपनी काउंसिल से खरीदारों से मिलें, और शिपमेंट से पहले खरीदार को जाँचें।

ट्रेड रूट दिखाती स्क्रीन के सामने हाथ मिलाते दो बिज़नेस लोग।

खरीदार से पहले बाज़ार चुनें

खरीदार ढूँढने से पहले दो या तीन देश चुनें जिन पर ध्यान देना है। सरकारी आयात आंकड़े बताते हैं कि कौन से देश आपका प्रोडक्ट खरीदते हैं, कितना, यह कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है, और उसमें से कितना पहले से भारत से आता है। देशों की तुलना 6 अंकों के प्रोडक्ट टाइप पर करें, क्योंकि हर देश के आंकड़े इसी स्तर पर मिलते हैं।

  • बड़े और बढ़ते आयात बाज़ार में नए सप्लायर के लिए जगह होती है।
  • भारत का अच्छा हिस्सा दिखाता है कि वहाँ भारतीय माल चलता है। छोटा हिस्सा मौक़ा भी हो सकता है, या किसी रुकावट का संकेत।
  • देखें कि वहाँ के खरीदार आपके प्रोडक्ट पर कितनी ड्यूटी देते हैं, और क्या भारत के साथ कोई ट्रेड एग्रीमेंट उसे कम करता है।
  • देखें कि वहाँ माल बेचने से पहले बाज़ार क्या माँगता है, जैसे सर्टिफ़िकेट, टेस्ट या लेबल।
उदाहरण: दो बाज़ार (काल्पनिक आंकड़े)
  • बाज़ार A हर साल आपके प्रोडक्ट का US$5 करोड़ का आयात करता है। उसमें भारत का हिस्सा 2% है, यानी भारतीय सप्लायर वहाँ US$10 लाख का माल बेचते हैं।
  • बाज़ार B हर साल US$1 करोड़ का आयात करता है। भारत का हिस्सा 20% है, यानी US$20 लाख।
  • A पाँच गुना बड़ा है, लेकिन B में भारतीय माल पहले से चल रहा है। A चुनने से पहले पता करें कि भारत वहाँ इतना कम क्यों बेचता है: ड्यूटी, नियम, या बस यह कि किसी ने कोशिश नहीं की।

उन आयातकों से शुरू करें जो पहले से खरीदते हैं

कुछ देश अपने कस्टम्स रिकॉर्ड में बताते हैं कि किसने क्या आयात किया। जहाँ ऐसा है, वहाँ आप उन कंपनियों के नाम देख सकते हैं जो पहले से आपका प्रोडक्ट खरीदती हैं, भारत से भी। हमारा Buyers abroad टूल उन देशों के लिए ये नाम दिखाता है जिनके रिकॉर्ड हमारे पास हैं। जो कंपनी पहले से आपका प्रोडक्ट आयात करती है, वह उसे समझती है, उसकी सप्लाई चेन बनी हुई है, और उसे दूसरा सप्लायर चाहिए हो सकता है।

  1. चुने हुए बाज़ार के रिकॉर्ड में अपने प्रोडक्ट के 6 अंकों के कोड से खोजें।
  2. उन आयातकों की शॉर्टलिस्ट बनाएँ जिनकी मात्रा आपकी सप्लाई क्षमता से मेल खाती हो।
  3. हर एक को समझें: उसकी वेबसाइट, वह और क्या खरीदता है और कहाँ से।
  4. छोटा और साफ़ ऑफ़र भेजें: प्रोडक्ट और उसका कोड, आपकी क्षमता, आपके सर्टिफ़िकेट, और किसी तय Incoterm पर कीमत।
  5. एक-दो हफ़्ते बाद फ़ॉलो-अप करें, और वे माँगें तो सैंपल भेजें।

खरीदारों से आमने-सामने मिलें

  • आपके प्रोडक्ट के क्षेत्र के ट्रेड मेले वह जगह हैं जहाँ खरीदार सप्लायर ढूँढने आते हैं। DGFT का Trade Connect प्लेटफ़ॉर्म, trade.gov.in, भारत और विदेश के ट्रेड इवेंट की लिस्ट देता है, साथ में देश और प्रोडक्ट की गाइड भी। इसमें खरीदार खोजने का एक हिस्सा भी है, और आप ट्रेड एक्सपर्ट से सवाल पूछ सकते हैं।
  • आपकी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल आपके प्रोडक्ट समूह का निर्यात बढ़ाने के लिए ही बनी है। उससे पूछें कि वह आपके बाज़ारों में कौन से मेले और बायर-सेलर मीट करने वाली है।
  • विदेश व्यापार नीति के तहत DGFT के रीजनल ऑफ़िस, हर ज़िले की एक्सपोर्ट प्रमोशन कमेटी के ज़रिए, आपके ज़िले में भी बायर-सेलर मीट और मेले करवा सकते हैं।

शिपमेंट से पहले खरीदार को जाँचें

  1. पक्का करें कि कंपनी असल में है: उसके अपने देश में उसका रजिस्ट्रेशन, पता, वेबसाइट, और उसे कौन चलाता है।
  2. कंपनी को, और जहाँ हो सके उसके मालिकों को, सैंक्शन लिस्ट से मिलाएँ।
  3. शिपमेंट से पहले शर्तें लिखित में तय करें: प्रोडक्ट, क्वालिटी, मात्रा, कीमत, Incoterm, पेमेंट की शर्तें और डिलीवरी की तारीख़, किसी कॉन्ट्रैक्ट या साइन किए हुए प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस में।
  4. पहले ऑर्डर पर एडवांस पेमेंट या किसी भरोसेमंद बैंक का लेटर ऑफ क्रेडिट माँगें।
  5. एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस के बारे में सोचें। ECGC का कवर तब नुकसान से बचाता है जब खरीदार दिवालिया हो जाए या पेमेंट न करे, और कुछ राजनीतिक जोखिमों से भी।
  6. छोटे ऑर्डर से शुरू करें, और खरीदार के समय पर पेमेंट करने पर ही ज़्यादा उधार दें।

ध्यान दें: लोग अक्सर ऐसे नए खरीदार को उधार पर माल भेज देते हैं जिसे किसी ने जाँचा नहीं। 1 अक्टूबर 2026 से निर्यात हुए माल के लिए RBI चाहता है कि शिपमेंट के नौ महीने के अंदर पेमेंट आ जाए, या बारह महीने के अंदर अगर इनवॉइस या सेटलमेंट रुपये में हो। अगर कोई पेमेंट उस डेडलाइन, या बैंक की दी हुई बढ़ी मोहलत, के एक साल बाद भी बाकी है, तो आगे आप सिर्फ़ पूरे एडवांस पेमेंट या इररिवोकेबल लेटर ऑफ क्रेडिट पर ही निर्यात कर सकते हैं।

संक्षेप में

  • ट्रेड आंकड़ों से दो या तीन बाज़ार चुनें: आकार, बढ़त और भारत का हिस्सा देखकर।
  • कस्टम्स रिकॉर्ड में नाम वाले आयातक पहले से आपका प्रोडक्ट खरीदते हैं; शुरुआत उन्हीं से करें।
  • ट्रेड मेलों में, अपनी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के ज़रिए और DGFT के Trade Connect पर खरीदारों से मिलें।
  • हर नए खरीदार को जाँचें, और पहले ऑर्डर पर एडवांस पेमेंट या लेटर ऑफ क्रेडिट माँगें।

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3.एक नया खरीदार पहले ऑर्डर पर 90 दिन का खुला उधार माँगता है। ज़्यादा सुरक्षित जवाब क्या है?

इस पाठ के शब्द

स्रोत

इन स्रोतों से तथ्य जाँचे गए:

ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।