- असेसेबल वैल्यूवह कीमत जिस पर कस्टम्स ड्यूटी लगाता है: आम तौर पर CIF कीमत, कस्टम्स एक्सचेंज रेट पर रुपये में बदली हुई।
- आउट ऑफ चार्जOOCकस्टम्स का वह आदेश जिसके बाद आयात का माल पोर्ट, एयरपोर्ट या ICD से बाहर जा सकता है। यह ड्यूटी भरने और जाँच (अगर हुई) पूरी होने के बाद मिलता है; उसके बाद आप माल ले जा सकते हैं।
- एंटी-डंपिंग ड्यूटीADDनामित देशों से आने वाले, और कभी-कभी नामित निर्यातकों के, किसी प्रोडक्ट पर अतिरिक्त ड्यूटी, जब वह अपनी सामान्य कीमत से कम पर बेचा जा रहा हो। यह सिर्फ़ नोटिफ़िकेशन में नामित माल और पक्षों पर लगती है।
- एयर वे बिलAWBहवाई रास्ते से माल ले जाने की एयरलाइन की रसीद और कॉन्ट्रैक्ट। बिल ऑफ लैडिंग की तरह यह मालिकाना हक़ का काग़ज़ नहीं है: एयरलाइन माल उसी को देती है जिसका नाम इस पर कंसाइनी के रूप में लिखा है।
- कमर्शियल इनवॉइसभेजे गए माल का विक्रेता का फ़ाइनल बिल: क्या बेचा, कितना, किस कीमत पर और किस Incoterm पर। कस्टम्स और बैंक इसी से काम करते हैं, इसलिए यह पैकिंग लिस्ट और ट्रांसपोर्ट दस्तावेज़ से मेल खाना चाहिए।
- कस्टम्स एक्सचेंज रेटहर करेंसी के लिए CBIC का तय किया रुपये का रेट, आम तौर पर महीने में दो बार। कस्टम्स वही रेट लेता है जो आपका बिल ऑफ एंट्री या शिपिंग बिल फ़ाइल होने के दिन लागू हो।
- काउंटरवेलिंग ड्यूटीCVDअतिरिक्त ड्यूटी जो उस सब्सिडी का असर खत्म करती है जो किसी विदेशी सरकार ने निर्यातक को दी हो। पुराने भारतीय कागज़ों में "CVD" उस एडिशनल कस्टम ड्यूटी के लिए भी लिखा जाता था जिसकी जगह 2017 में IGST ने ली।
- चैप्टर (अध्याय)HS कोड के पहले 2 अंक: माल का एक बड़ा परिवार, जैसे 61 यानी निटेड (बुनाई वाले) कपड़े।
- ड्यूटी ड्रॉबैकDBKनिर्यात होने वाले माल को बनाने में लगे आयातित कच्चे माल पर भरी कस्टम ड्यूटी की वापसी, या आयात किया माल फिर से बाहर भेजने पर उसकी ड्यूटी की वापसी। ज़्यादातर निर्यातक इसे शिपिंग बिल में ही, हर प्रोडक्ट की तय दर यानी ऑल इंडस्ट्री रेट पर क्लेम करते हैं।
- पर्पस कोडRBI का छोटा कोड, जो आप विदेश से आने या विदेश जाने वाले हर पेमेंट के साथ बैंक को देते हैं, ताकि पता चले कि पैसा किस काम का है। P से शुरू होने वाले कोड आने वाले पैसे के हैं और S वाले जाने वाले पैसे के, जैसे आयात का इनवॉइस चुकाने के लिए S0102।
- पैकिंग लिस्टशिपमेंट के हर पैकेज में क्या है, उसकी मात्रा, वज़न और साइज़ के साथ सूची। DGFT ने इसे हर आयात और निर्यात के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ बनाया है, और कमर्शियल इनवॉइस-कम-पैकिंग लिस्ट भी मान्य है।
- प्रेफ़रेंशियल रेट (रियायती दर)MFN रेट से कम ड्यूटी, जो किसी ट्रेड एग्रीमेंट या स्कीम के तहत किसी खास देश के माल को मिलती है, अगर माल उसके रूल्स ऑफ ओरिजिन पूरे करे।
- प्रोडक्ट टाइपआधिकारिक नाम: सब-हेडिंगपहले 6 अंक। ये पूरी दुनिया में एक जैसे होते हैं, इसलिए विदेशी ड्यूटी और ट्रेड के आँकड़ों की तुलना इसी स्तर पर होती है।
- प्रोडक्ट फ़ैमिलीआधिकारिक नाम: हेडिंगपहले 4 अंक, जैसे 6109 यानी टी-शर्ट, सिंगलेट और बनियान।
- प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइसशिपमेंट से पहले विक्रेता का भेजा पहला इनवॉइस, जिसमें माल, कीमत और शर्तें लिखी होती हैं, ताकि खरीदार ऑर्डर पक्का करे, एडवांस दे या लेटर ऑफ क्रेडिट खुलवाए। कस्टम्स माल इस इनवॉइस पर क्लियर नहीं करता।
- बिल ऑफ एंट्रीकस्टम्स की वह घोषणा जो आयातक भारत में माल लाने के लिए फ़ाइल करता है।
- बिल ऑफ लैडिंगB/Lसमुद्र के रास्ते ले जाने के लिए माल लेते समय शिपिंग लाइन जो दस्तावेज़ देती है: माल की रसीद, ढुलाई का कॉन्ट्रैक्ट, और आम तौर पर माल पर मालिकाना हक़ का काग़ज़। माल छुड़ाने के लिए खरीदार आम तौर पर इसकी ओरिजिनल कॉपी जमा करता है।
- रूल्स ऑफ ओरिजिनवे शर्तें जो माल को किसी देश में बना हुआ मानने के लिए पूरी होनी चाहिए, जैसे वहाँ काफ़ी प्रोसेसिंग या काफ़ी लोकल कंटेंट।
- लेट एक्सपोर्ट ऑर्डरLEOकस्टम्स का वह आदेश जिसके बाद निर्यात का माल जहाज़ या हवाई जहाज़ पर लद सकता है। यह तब मिलता है जब कस्टम्स शिपिंग बिल से, और जाँच करे तो माल से भी, संतुष्ट हो जाता है।
- लेटर ऑफ क्रेडिटLC, जिसे डॉक्यूमेंटरी क्रेडिट भी कहते हैंखरीदार की तरफ़ से बैंक का वादा कि विक्रेता जब क्रेडिट की शर्तों के मुताबिक दस्तावेज़ जमा करेगा, तो बैंक उसे पेमेंट करेगा। ज़्यादातर LC इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के UCP 600 नियमों के तहत खुलते हैं।
- लैंडेड कॉस्टभारत पहुँचने पर माल की कुल लागत: असेसेबल वैल्यू, उसमें कस्टम ड्यूटी और IGST जोड़कर। इसमें पोर्ट, क्लियरिंग और ट्रांसपोर्ट के खर्च शामिल नहीं हैं।
- शिपिंग बिलकस्टम्स की वह घोषणा जो निर्यातक भारत से माल बाहर भेजने के लिए फ़ाइल करता है।
- सटीक कोडआधिकारिक नाम: टैरिफ़ लाइनभारत में इस्तेमाल होने वाला पूरा 8 अंकों का कोड। भारत की ड्यूटी और आयात-निर्यात के नियम इसी स्तर पर तय होते हैं।
- सर्टिफ़िकेट ऑफ ओरिजिन (मूल प्रमाणपत्र)वह दस्तावेज़ जो साबित करता है कि माल कहाँ बना है। ट्रेड एग्रीमेंट में कम ड्यूटी का फ़ायदा लेने के लिए यह चाहिए।
- सेक्शन 301अमेरिका का एक ट्रेड क़ानून, जिससे अमेरिका किसी देश के माल पर अतिरिक्त ड्यूटी लगा सकता है, अगर उसे लगे कि उस देश के व्यापार के तरीके अनुचित हैं। यह खास तौर पर कई चीनी सामानों पर लगी अतिरिक्त ड्यूटी के लिए जाना जाता है।
- सेफ़गार्ड ड्यूटीएक अस्थायी अतिरिक्त ड्यूटी, जब आयात में अचानक भारी उछाल से भारतीय उत्पादकों को गंभीर नुकसान हो। यह आम तौर पर सभी देशों से आयात पर लगती है, कुछ छूटों के साथ।
- सैंक्शन्स लिस्ट (प्रतिबंध सूची)सरकार की वह सूची जिसमें ऐसे लोग, कंपनियाँ, जहाज़ और विमान होते हैं जिनसे आप लेन-देन नहीं कर सकते, या सिर्फ़ लाइसेंस लेकर ही कर सकते हैं। हम UN, अमेरिका और UK की सूचियाँ जाँचते हैं।
- AD बैंकऑथराइज़्ड डीलर (कैटेगरी-I) बैंकऐसा बैंक जिसे RBI ने विदेशी मुद्रा (फ़ॉरेन एक्सचेंज) का काम करने की इजाज़त दी है। आपके निर्यात की कमाई और आयात के पेमेंट इसी से होकर जाते हैं, और यह उनकी जानकारी RBI को देता है।
- AIDCएग्रीकल्चर इंफ़्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेसकुछ तय आयातित माल पर लगने वाला सेस, जैसे सोना और कुछ खाने के तेल। जहाँ यह लगता है, वहाँ आम तौर पर बेसिक कस्टम ड्यूटी उसी हिसाब से घटा दी जाती है।
- BCDबेसिक कस्टम ड्यूटीभारत में आयात की मुख्य ड्यूटी। हर 8 अंकों वाले कोड की अपनी दर होती है, आम तौर पर असेसेबल वैल्यू का एक प्रतिशत। दरें कस्टम्स टैरिफ़ एक्ट और CBIC के नोटिफ़िकेशन से आती हैं।
- BISब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (भारतीय मानक ब्यूरो)भारत में स्टैंडर्ड तय करने वाली सरकारी संस्था। यह इंडियन स्टैंडर्ड बनाती है और निर्माताओं को ISI जैसा स्टैंडर्ड मार्क लगाने का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन देती है; जिस प्रोडक्ट पर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर लागू हो, उस पर यह मार्क ज़रूरी है, आयात किए माल पर भी।
- CBICसेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज़ एंड कस्टम्स (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड)वित्त मंत्रालय की संस्था जो कस्टम्स और GST चलाती है। यह ड्यूटी के नोटिफ़िकेशन और कस्टम्स एक्सचेंज रेट जारी करती है।
- CBLRकस्टम्स ब्रोकर्स लाइसेंसिंग रेगुलेशन्स, 2018CBIC के नियम, जो बताते हैं कि कस्टम ब्रोकर कौन बन सकता है, लाइसेंस की परीक्षा कैसे होती है, और ब्रोकर को क्या करना है और क्या नहीं। इन्हीं के तहत CBIC की ट्रेनिंग अकादमी NACIN लिखित और मौखिक परीक्षा लेती है।
- CFSकंटेनर फ़्रेट स्टेशनकिसी पोर्ट, एयरपोर्ट या ICD से जुड़ा कस्टम्स एरिया, जो पोर्ट की भीड़ कम करने के लिए बनता है। यहाँ कंटेनर भरे और खोले जाते हैं और माल की जाँच होती है, पर कागज़ों का असेसमेंट मूल कस्टम हाउस में होता है।
- CHA (कस्टम ब्रोकर)कस्टम हाउस एजेंट, क़ानून में अब नाम कस्टम्स ब्रोकरभारतीय कस्टम्स से लाइसेंस पाया व्यक्ति, जो आयातकों और निर्यातकों की तरफ़ से बिल ऑफ एंट्री और शिपिंग बिल फ़ाइल करता है और कस्टम्स का काम संभालता है। क़ानून में अब इसे कस्टम्स ब्रोकर कहते हैं, पर ज़्यादातर ट्रेडर अब भी CHA ही बोलते हैं।
- CIFकॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ़्रेट (लागत, बीमा और भाड़ा)माल की कीमत, उसमें भारतीय पोर्ट तक का भाड़ा और बीमा जोड़कर। भारतीय कस्टम्स आयात ड्यूटी इसी कीमत पर निकालता है।
- D/Aडॉक्यूमेंट्स अगेंस्ट एक्सेप्टेंसD/P जैसा ही, पर खरीदार का बैंक दस्तावेज़ तभी दे देता है जब खरीदार बिल ऑफ एक्सचेंज स्वीकार कर ले, यानी आगे की तय तारीख़ पर पेमेंट का वादा। उस तारीख़ पर पेमेंट न आने का जोखिम आपका है।
- D/Pडॉक्यूमेंट्स अगेंस्ट पेमेंटआपका बैंक शिपिंग के दस्तावेज़ खरीदार के बैंक को भेजता है, जो उन्हें खरीदार को तभी देता है जब वह पेमेंट कर दे। बैंक ICC के URC 522 नियमों पर चलते हैं, पर खरीदार के पेमेंट की गारंटी नहीं देते।
- DGCI&Sडायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्सवह दफ़्तर जो भारत के आयात और निर्यात के आधिकारिक मासिक आँकड़े जारी करता है।
- DGFTडायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फ़ॉरेन ट्रेड (विदेश व्यापार महानिदेशालय)वाणिज्य मंत्रालय का दफ़्तर जो भारत की आयात-निर्यात नीति तय करता है और IEC व लाइसेंस जारी करता है।
- DGTRडायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (व्यापार उपचार महानिदेशालय)वह दफ़्तर जो डंपिंग, सब्सिडी और आयात में अचानक उछाल की जाँच करता है और एंटी-डंपिंग, काउंटरवेलिंग या सेफ़गार्ड ड्यूटी की सिफ़ारिश करता है।
- EDPMSएक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टमRBI का सिस्टम, जिसमें हर निर्यात आपके बैंक के नाम दर्ज होता है और तब तक खुला रहता है जब तक बैंक उसे पेमेंट आया हुआ मानकर बंद न कर दे। कोई निर्यात डेडलाइन के एक साल बाद भी बकाया रहे, तो आगे के निर्यात सिर्फ़ पूरे एडवांस पेमेंट या इर्रिवोकेबल लेटर ऑफ क्रेडिट पर हो सकते हैं।
- FCLफ़ुल कंटेनर लोडएक ही शिपर का अपने माल के लिए बुक किया पूरा कंटेनर, जिसका भाड़ा पूरे कंटेनर का लगता है, चाहे वह भरा हो या नहीं।
- FOBफ़्री ऑन बोर्डनिर्यात वाले पोर्ट पर जहाज़ पर लद जाने तक माल की कीमत, बिना भाड़े और बीमे के। निर्यात की कीमतें आम तौर पर FOB पर बताई जाती हैं।
- FTAफ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता)देशों के बीच का समझौता जो पार्टनर देश में बने माल पर ड्यूटी घटाता या हटाता है। इसका फ़ायदा लेने के लिए आम तौर पर सर्टिफ़िकेट ऑफ ओरिजिन चाहिए।
- GSP और DCTSऐसी स्कीमें जिनके तहत अमीर देश विकासशील देशों के माल पर कम या कोई ड्यूटी नहीं लेते। GSP नाम EU और कुछ दूसरे देश इस्तेमाल करते हैं; UK की स्कीम का नाम DCTS है। कौन सा भारतीय माल इसके लायक है, यह देश और प्रोडक्ट पर निर्भर करता है।
- HS कोडहार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोडवह नंबर जिससे दुनिया भर के व्यापार में किसी प्रोडक्ट की पहचान होती है। पहले 6 अंक हर देश में एक जैसे होते हैं; भारत 2 अंक और जोड़कर 8 अंकों का कोड बनाता है।
- ICDइनलैंड कंटेनर डिपोसमुद्री पोर्ट से दूर, देश के अंदर बना कस्टम्स स्टेशन, जिसे ड्राई पोर्ट भी कहते हैं। यहाँ पोर्ट की तरह ही कंटेनर क्लियर होते हैं और बिल ऑफ एंट्री या शिपिंग बिल फ़ाइल और असेस होता है।
- ICEGATEइंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक गेटवेकस्टम्स की वेबसाइट जहाँ बिल ऑफ एंट्री और शिपिंग बिल फ़ाइल होते हैं और ताज़ा एक्सचेंज रेट दिखते हैं।
- IECइम्पोर्टर एक्सपोर्टर कोडDGFT का 10 कैरेक्टर वाला नंबर, जो भारत में आयात या भारत से निर्यात करने के लिए किसी बिज़नेस को चाहिए।
- IGSTइंटीग्रेटेड GSTआयात पर लगने वाला GST, जो असेसेबल वैल्यू में बेसिक कस्टम ड्यूटी और सरचार्ज जोड़कर निकाला जाता है। GST में रजिस्टर्ड आयातक आम तौर पर इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में वापस ले सकता है।
- Incoterms (इनकोटर्म्स)मौजूदा संस्करण: Incoterms® 2020इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) की 11 तीन-अक्षर वाली ट्रेड शर्तें, जैसे EXW, FOB और CIF। आपके कॉन्ट्रैक्ट में लिखी शर्त बताती है कि भाड़ा और बाकी खर्च कौन देगा, और जोखिम कहाँ विक्रेता से खरीदार के पास जाता है।
- ITC(HS)DGFT की सूची, जो हर 8 अंकों वाले कोड के लिए बताती है कि भारत उसका आयात या निर्यात खुले तौर पर करने देता है, सिर्फ़ लाइसेंस से, सिर्फ़ स्टेट ट्रेडिंग एंटरप्राइज़ के ज़रिए, या बिल्कुल नहीं।
- LCLलेस दैन कंटेनर लोडपूरे कंटेनर से छोटी शिपमेंट, जो दूसरे शिपरों के माल के साथ एक कंटेनर में जाती है। इसे आम तौर पर कंटेनर फ़्रेट स्टेशन पर भरा और खोला जाता है, और भाड़ा माल के आयतन या वज़न से लगता है।
- LEIलीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर20 कैरेक्टर का कोड, जो दुनिया भर में वित्तीय लेन-देन में किसी कंपनी की पहचान करता है। किसी कंपनी के पास यह होना या न होना यह नहीं बताता कि वह जोखिम वाली है या नहीं।
- LUTलेटर ऑफ अंडरटेकिंग (फ़ॉर्म GST RFD-11)GST में रजिस्टर्ड निर्यातक हर फ़ाइनेंशियल ईयर के लिए, निर्यात से पहले, GST पोर्टल पर यह अंडरटेकिंग फ़ाइल करता है, ताकि बिना IGST भरे माल या सर्विस निर्यात कर सके।
- MFN रेटमोस्ट-फ़ेवर्ड-नेशन रेटवह सामान्य ड्यूटी जो कोई देश WTO के दूसरे सदस्य देशों के माल पर लेता है, जब कोई ट्रेड एग्रीमेंट या खास स्कीम इससे कम दर न देती हो।
- QCOक्वालिटी कंट्रोल ऑर्डरसरकार का वह आदेश जो किसी प्रोडक्ट के लिए BIS सर्टिफ़िकेशन ज़रूरी कर देता है। लागू होने के बाद वह प्रोडक्ट BIS स्टैंडर्ड मार्क के बिना भारत में न बन सकता है, न आयात हो सकता है, न बिक सकता है, सिवाय उन छूटों के जो ऑर्डर में ही लिखी हों।
- RCMCरजिस्ट्रेशन-कम-मेंबरशिप सर्टिफ़िकेटइस बात का सबूत कि आप अपने मुख्य प्रोडक्ट की एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल या कमोडिटी बोर्ड के सदस्य हैं, या कोई काउंसिल न हो तो FIEO के। फ़ॉरेन ट्रेड पॉलिसी में ज़्यादातर ऑथराइज़ेशन और फ़ायदों के लिए अर्ज़ी देने में यह चाहिए।
- RoDTEPरिमिशन ऑफ ड्यूटीज़ एंड टैक्सेज़ ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्सएक स्कीम जो निर्यात के माल की लागत में शामिल केंद्र, राज्य और स्थानीय ड्यूटी और टैक्स लौटाती है, जो किसी और स्कीम से वापस नहीं मिलते। आप इसे शिपिंग बिल में क्लेम करते हैं और ICEGATE पर e-scrip मिलती है, जिससे बेसिक कस्टम ड्यूटी भरी जा सकती है या जिसे किसी और IEC धारक को ट्रांसफ़र किया जा सकता है।
- RUCRegistro Único de Contribuyentes (टैक्सपेयर्स का यूनिक रजिस्टर)पेरू में बिज़नेस का टैक्स ID, भारत के PAN जैसा।
- STEस्टेट ट्रेडिंग एंटरप्राइज़सरकार की नामित संस्था, जिसे अकेले ही कुछ खास माल, जैसे कुछ कृषि उत्पाद, आयात या निर्यात करने की इजाज़त होती है।
- SUNATपेरू की टैक्स और कस्टम्स एजेंसी। यह पेरू की आयात घोषणाएँ प्रकाशित करती है, और खरीदारों के नाम वहीं से आते हैं।
- SWSसोशल वेलफ़ेयर सरचार्जआयात पर एक अतिरिक्त चार्ज, आम तौर पर बेसिक कस्टम ड्यूटी का 10%, माल की कीमत का नहीं। कुछ माल पर यह कम लगता है या बिल्कुल नहीं लगता।
ट्रेड अकादमी सिर्फ़ सीखने के लिए है, कानूनी, टैक्स या कस्टम्स सलाह नहीं। नियम और रेट नोटिफ़िकेशन से बदलते रहते हैं: कोई कदम उठाने से पहले लाइव स्रोत देखें या किसी लाइसेंसधारी कस्टम ब्रोकर से पूछें।